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blood cell (रक्त कोशिकाए)| general science in hindi

blood cell (रक्त कोशिकाए), human blood general science in hindi





Blood

कोशिका शरीर की  कार्यात्मक इकाई है। कोशिका से ऊतक बनते हैं ऊतक से अंग तथा अंगो से मिलकर अंग तंत्र  बनता है।
Cell---tissu----organ----organ system

रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है
रक्त के कार्य-
अ) का स्थानांतरण करना।
ब) शरीर के तापमान को नियंत्रण करना ( 98.4 F लगभग)
स) रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करना।

  • सबसे बड़ा अंग त्वचा है।
  • ब्लड के अध्ययन को हेमेटोलॉजी (haimatology) कहते हैं।
  • मानव रक्त प्लाज्मा (plazma) और कणिकाएं (corpuscles) से मिलकर बना होता है। रक्त में 60% प्लाज्मा होता है और 40% कणिकाएं होती है।

प्लाज्मा- प्लाज्मा में पानी की मात्रा 90% प्रोटीन की मात्रा 7%, खनिज लवण और ग्लूकोज 3% के लगभग होता है।
प्लाज्मा का कार्य कणिकाओं (corpuscles) को जगह देना और उनका स्थानांतरण करना है।

 कणिकाएं (corpuscles)-
लाल रक्त कणिका (red blood cells)
श्वेत रक्त कणिका (white blood cells) 
प्लेटलेट्स, बिम्बाणु ( Platelets)

लाल रक्त कणिकाएं 
इसका काम शरीर में सभी भागों तक ऑक्सीजन को पहुंचाना होता है। मलेरिया रोग लाल रक्त कणिकाओं को प्रभावित करता है। यह रोग मादा एनाफिलीज के काटने से फैलता है। यह एक प्रोटोजोआ जनित रोग है जो प्लाज्मोडियम नामक प्रोटोजोआ से फैलता है यह लाल रक्त कणिका में रहता है और उन्हें खाता है। इस रोग को दूर करने की दवाई कुनैन है जो सिनकोना की छाल से प्राप्त होती है।

  • लाल रक्त कणिकाओं की खोजMalpighi and swammerdam  की थी। इसका रासायनिक नाम एन्थ्रेसाइट है।
  • मानव शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या 4.5 - 5.5 million/cubic होती है।
  • RBC का निर्माण हिमोग्लोबिन के कारण होता है
  • लाल रक्त कणिकाओं के अंदर ' तथा 'ग्लोबिन' प्रोटीन होता है।
  • कुछ रक्त की मात्रा हमारे प्लीहा (spleen) में होती है। शरीर में बीमारी की अवस्था चोट लग जाने पर खून की कमी को, इसी प्लीहा (spleen) द्वारा पूरा किया जाता है। इसलिए इसे लाल रक्त कणिकाओं का 'कब्रिस्तान' भी कहा जाता है।

  • जब वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी होने लगती है तो लाल रक्त कणिकाओं की मात्रा बढ़ने लगती है। इसका जीवन काल 120 दिन होता है जैसे पहाड़ पर चढ़ने के बाद हमारे मुंह का रंग लाल हो जाता है

  • एनीमिया रोग रोग में लाल रक्त कणिकाओं की कमी हो जाती है नाकी रक्त की, इसी के कारण हमें चक्कर आते हैं क्योंकि ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया होकर हमें एनर्जी नहीं मिल पाती।
  • जब भी हम कोई व्यायाम क्या कठिन परिश्रम करते हैं तो हमारे शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की मात्रा 30% बढ़ जाती है क्योंकि इसको ऑक्सीजन की मात्रा को पूरा करना होता है।
  • लाल रक्त कणिकाओं का आकार अवतलीय होता है।
  • लोहे के बर्तन में शराब पीने से लोहामयता नामक रोग हो जाता है क्योंकि उसे शरीर में लोहे की मात्रा बढ़ जाती है

सफेद रक्त कणिकाएं (white blood cell) WBC
सफेद रक्त कणिकाओं की खोज ग्रेबिल ने की थी। इसका का रासायनिक नाम ल्यूकोसाइट है। WBC  की संख्या 8000 से 10000 के लगभग होती है। इसका जीवन काल 4 से 7 दिन का होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इसका आकार अमीबा के जैसा होता है।

  • Mecrophenge बैक्टीरिया की खोज macnicov ने की थी।
  • गंगा नदी का पानी कभी खराब नहीं होता क्योंकि इसमें माइक्रोफैन (microphenge) नामक बैक्टीरिया होता है।
  • WBC  की मात्रा ज्यादा बढ़ जाने पर ब्लड कैंसर (ल्यूकोमिया) हो जाता हैं।

 प्लेटलेट्स (platelets)
प्लेटलेट्स की खोज विलियम ऑस्लर (william osler) ने की थी। इसका रासायनिक नाम thrombocytes है।

  • प्लेटलेट्स की संख्या 250000 से 450000 lakhs/cubic mm होती है
  • Platelets का जीवनकाल 2 से 4 दिन का होता है।तथा इसका का कार्य खून में थक्का जमाने का होता है।
  • हीमोफीलिया नामक बीमारी से खून का थक्का नहीं जमता है।
  • रक्त के जमने में कैल्शियम तत्व शामिल है। 
  • Platelets में में फाइब्रिन ( fibrin) नामक प्रोटीन होता है।
  • रक्त में विटामिन K होता है जो रक्त को जमने में सहायता प्रदान करता है।

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