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Indian history: sindhu ghati sabhyata in hindi (सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषताएं)

 इस भाग में हमने भारत की  sindhu ghati sabhyata सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषता का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इस भाग से परीक्षा में बहुत  प्रश्न पुछे जाते  अतः अध्ययन की दृष्टी से यह एक महत्वपूर्ण टॉपिक है।


 sindhu ghati sabhyata in hindi (सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषताएं):-

sindhu ghati  ki viseshataye
Indian history

 हड़प्पा सभ्यता या सिंधु घाटी सभ्यता का यह नाम  इसलिए पड़ा| क्योंकि इसके प्रथम अंश हड़प्पा नामक स्थल से प्राप्त हुए थे तथा इसके शुरुआती स्थलों में से अधिकांश सिंधु नदी के किनारे अवस्थित थे। इसके अलावा सिधु घाटी के लोगो ने ताँबे में टिन मिलाकर कांसा तैयार किया था इसलिए इसे कांस्य युगीन सभ्यता भी कहते है।
 सिंधु घाटी सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप में प्रथम नगरीय क्रांति के अवस्था को दर्शाती है। सबसे पहले चाल्र्स मैसन ने 1826 ई. में हड़प्पा नामक स्थल पर एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिलने के प्रमाण की पुष्टि किये थे। भारत में प्रागैतिहासिक स्थलों को खोजने का कार्य ' भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग करता है।
भारतीय पुरातत्व विभाग के जन्मदाता का श्रेय अलेक्जेंडर कनिंघम को प्राप्त है तथा भारत में पुरातत्व विभाग की स्थापना का श्रेय वायसराय लार्ड कर्जन' को प्राप्त है। 1921 ई. में भारतीय पुरातत्व विभाग के महानिदेशक जॉन मार्शल' थे तब रायबहादुर दयाराम साहनी ने 1921 ई. में हड़प्पा की तथा राखालदास । बनर्जी ने 1922 ई. में मोहनजोदड़ो की खुदाई कराई थी।
       

 सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त महत्वपूर्ण वस्तुये तथा विशेषताये:-

  •  बनवाली:- सरस्वती नदी के किनारे स्थित है। इसका वर्तमान क्षेत्र हरियाणा है। इसके उत्खलनकर्ता रविंद्र सिंह विष्ट थे । इस क्षेत्र में  मकानों में अग्निवेदिकाएं, जौं, मिट्टि का हल, सड़को पर बेल गाड़ी के पहिये आदि।

  • कालीबंगा:- यह नगर राजिस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्तिथ है। कालीबंगा का अर्थ: काले रंग की चूड़ियाँ घग्घर नदी (प्राचीन नाम सरस्वती नदी) के बाएं तट पर स्थित है। यंहा पर जुते हुए खेत, लकड़ी की नालियां, अग्नि हवन कुंड, चुड़िया 

  • लोथल:- लोथल सिंधु घाटी का एक महत्वपूर्ण नगर था लोथल अहमदाबाद (गुजरात) जिले में सरगवल (Saragvala) नामक गाँव के समीप स्थित है। 1955 तथा 1962 के मध्य यहां  एस.आर. राव के निर्देशन में खुदाई की गयी जहां लगभग दो मील के घेरे में बसे हुए एक नगर के अवशेष प्राप्त हुए। यह 6 खण्डों में  विभक्त था। यहां ऊंचे चबूतरे, रक्षा प्राचीर, सड़क तथा मकानों के अवशेष मिले हैं। यहां की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि पकी ईंटों का बना हुआ विशाल आकार (214x36 मीटर) का एक घेरा है जिसे राव महोदय ने 'जहाजों की गोदी' बताया है। इस प्रकार लोथल एक पत्तन(बंदरगाह) नगर था। यह भोगवा नदी के किनारे स्थित था। लोथल में दो भिन्न-भिन्न टीले नहीं मिलते। पूरी की पूरी बस्ती एक ही दीवार से घिरी थी।

  • चन्हूदड़ों:- इस स्थल उत्खनन कर्ता गोपाल मजूमदार तथा अर्नेस्ट मैक थे।  यह सिंधु नदी के बाएं तट पर स्थित है। यह ओर नगरों की भांति  दुर्गीकृत नहीं था। मार्शल व मैके ने यंहा पर  मनके बनाने का कारखाना खोजा था। ईट पर एक बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजों का चिन्ह, लिपिस्टिक, काजल, पाउडर कंघा आदि मिले।

  • रोपड़:- वर्तमान में यह पंजाब में स्तिथ है। यंहा से मानव के साथ कुत्ते को ददफनाने का प्रमाण मिले है

  • सुरकोटदा:- गुजरात मे स्तिथ जगपति जोशी ने खुदाई करवाई। यंहा से घोड़े की हड्डी, कलश शवाधान, तराजू का पलड़ा मिला है।

  • राखीगढ़ी:- यंहा पर ताम्र उपकरण, हड़प्पा लिपि युक्त मुद्रायें मिली 

  • नर्तकी की मूर्ति:- मोहनजोदड़ों से प्राप्त कांसे की बनी नर्तकी की मूर्ति सिंधु कला का  सर्वश्रेष्ठ उदारण है। इस मूर्ति के  गले में हार के साथ पूर्णतः नग्न है। सिर पीछे की ओर झुकाएं, आंखो झुकी हुई, दायीं भुजा कुल्हे पर टिकाए व बायीं भुजा नीचे लटकी हुई यह मूर्ति नृत्य की स्थिर मुद्रा को दर्शाती है।

  • विशाल स्नानागार:-  यह मोहनजोदड़ों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्मारक था। इसका निर्माण पक्की ईटों से दुर्ग क्षेत्र में किया गया था। इस विशाल स्नानागार का उपयोग सार्वजनिक रूप से धर्मानुष्ठान संबंधी स्नान के लिए होता था। जॉन मार्शल ने  इस विशाल स्नानागार को विश्व का आश्चर्यजनक निर्माण बताया था। यह जलपूजा का एकमात्र प्रमाण है।

  • पशुपति मुहर:--मोहान जोदड़ो से पशुपति मुहर प्राप्त हुई है जिसमे त्रिमुखी पुरूष को पद्मासन मुद्रा में बैठे दिखया गया है। इस मुहर में कुल 6 जानवरों को दिखाया गया है। जॉन मार्शल ने इसे आदि शिव की संज्ञा दी है। इस के अलावा यंहा से 'पुरोहित राजा' की मूर्ति भी मिली है।


                         :कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:


  1.  सिंधु सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता थी तथा यहां के लोग लोहे से परिचित नहीं थे।
  2.  मोहनजोदड़ो में मिली प्रसिद्ध नर्तकी (देवदासी) की कांस्य प्रतिमा (धातु निर्मित) से इस युग में कांस्य का प्रयोग किये जाने का पता चलता है।
  3.  हड़प्पा के सामान्य आवास क्षेत्र के दक्षिण में एक ऐसा कब्रिस्तान स्थित है जिसे समाधि R-37 ' नाम दिया गया। 
  4. मोहनजोदड़ो नगर के एच.आर.क्षेत्र, (HR area) से जो मानव-प्रस्तर मूर्तियां मिली है। 
  5. चन्हूदड़ों में किसी अन्य नगरो की भांति दुर्ग का अस्तित्व नहीं मिला है। 
  6. रोपड़ से एक ऐसा कब्रिस्तान मिला है जिसमें मनुष्य के साथ पालतू कुत्ता भी दफनाया गया था। 
  7. कालीबंगा में  हड़प्पा संस्कृति के एक जुते हुए खेत का साक्ष्य मिले हैं। 
  8. राखीगढ़ी भारत में स्थित इस सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल है। 
  9. सर्वाधिक संख्या में मुहर मोहनजोदड़ो से मिली हैं। जो मुख्यत: चौकोर आकार की है।
  10. लोथल व देशलपुर से तांबे की मुहर मिली है।
  11. हड़प्पा व चन्हूदड़ो से तांबे तथा कांसे की बैलगाड़ियों की आकृति प्राप्त हुई है।
  12. आंशिक शवाधान हड़प्पा, कला शवाधान मोहनजोदड़ो तथा प्रतीकात्मक शवाधान कालीबंगा से मिले हैं।
  13.  हड़प्पा सभ्यता  के लोग मातृदेवी की उपासना  करते थे। ये मूर्तिपूजा भी करते थे। 
  14. चावल के सबसे पहले साक्ष्य लोथल से प्राप्त हुए हैं
  15. मोहनजोदड़ो व कालीबंगा से मिली कुछ मुहरों पर पशुबलि देने के प्रमाण मिलते हैं। 
  16. लोथल में चावल के अवशेष तथा रंगुपर से धान की भूसी अवशेष प्राप्त हुई है। ये दोनों स्थल वर्तमान गुजरात में है। 


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Indian history: sindhu ghati sabhyata in hindi (सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषताएं) Indian history: sindhu ghati sabhyata in hindi (सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषताएं) Reviewed by vineet sha on November 26, 2018 Rating: 5

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