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प्राचीन भारत का इतिहास एक परिचय Indian history in hindi for ssc, railway,bank exam



 प्रिय मित्रों भारत का इतिहास (indian history)             प्रतियोगित परीक्षाओ के दृटिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण विषयों से एक है। इस विषय से लगभग हर पेपर में प्रश्न पुछे जाते है। इस साइट (site) पर आपको इतिहास के लिये
परीक्षा उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी जिस से आप पेपर में अच्छे अंक ला सके।

Indian history



                     इतिहास का विभाजन
 इतिहास को 3 वर्गों में विभक्त किया जा सकता है।

1. प्राक् इतिहास/ प्रागैतिहासिक काल
  (Pre-History Period) 
लिखित इतिहास के सबसे पहले कालखण्ड को प्रागैतिहासिक काल कहा गया है। | इस कालखण्ड के लोगों को लिपि या अक्षर अर्थात पड़ने लिखने का ज्ञान नहीं था। यह आदिम लोगों का इतिहास पत्थर व हड्डियों के औजारों तथा उनकी गुफा चित्रकारी से जानकारी लेकर लिखा गया है। पाषाणकाल को इसके अंतर्गत रखा गया है।
2. आद्य-ऐतिहासिक काल (Proto-History Period)  उस काल खण्ड का इतिहास जो ऐतिहासिक काल से पहले का है, जब लिपि व अक्षर का उन्हें ज्ञान था लेकिन आज भी उसे नहीं पढ़ा जा सका है, आद्य | ऐतिहासिक काल के अंतर्गत आता है। इतिहास लेखन की दृष्टि से सिन्धु घाटी । की सभ्यता व वैदिक काल को इसी काल खण्ड के अंतर्गत रखा गया है।
3. ऐतिहासिक काल (Historical Period): 
इतिहास का वह काल से संबंधित लिखित सामग्री प्राप्त होती है एवं उसे पढ़ा जा सका है। भारत में यह काल 6वीं शताब्दी ई.पू. से प्रारम्भ होता है। महाजनपद काल से अब तक का कालखंड शामिल हैं।



             इतिहास के जन्मदाता कौन थे
हेरोडोटस (Herodotus), यूनान का प्रथम इतिहासकार व भूगोलवेत्ता था। हेरोडोटस का संस्कृत नाम हरिदत्त था। 
हेरोडोटस हिस्ट्री (History) शब्द के  प्रथम प्रयोगकर्ता थे। इन्होंने वास्तविक इतिहास लेखन की नींव रखी थी। रोमन दार्शनिक सिसरो ने हेरोडोटस को इतिहास का जनक/पिता (Father of History) की संज्ञा दी थी। 
इन्होने अपने इतिहास का विषय पेलोपोनेसियन युद्ध को बनाया था। इनकी  प्रसिद्ध पुस्तक हिस्टोरिका (Historica) थी।


इतिहास की तिथियाँ 

अंग्रेजी में B.C. (ई.पू.) का तात्पर्य बिफोर क्राइस्ट' (ईसा पूर्व) से है। कभी-कभी तिथियों से पहले A.D. (ई.) लिखा जाता हैं। यह एनो डॉमिनी नामक दो लैटिन शब्दों से बना है तथा इसका तात्पर्य ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से है। 

आजकल A.D. की जगह C.E.तथा B.C. के स्थान पर B.C.E. का प्रयोग होता है। C.E. अक्षरों का प्रयोग 'कॉमन एरा' तथा B.C.E. का बिफोर कॉमन एरा के लिए होता है। इन शब्दों का प्रयोग इसलिए करते हैं क्योंकि विश्व के अधिकांश देशों में अब 'कॉमन एरा' का प्रयोग सामान्य हो गया है। 

समय शब्दावली
  • दशक (Decade): 10 वर्ष की अवधि।
  • सिल्वर जुबली (Silver Jubilee): 25 वर्ष की अवधि। 
  • रूबी जुबली (Ruby Jubilee): 40 वर्ष की अवधि। 
  • पूर्वाद्द् (First Half): सदी का प्रथम 50 वर्ष (1-50 वर्ष तक) ।
  •  गोल्डन जुबली (Golden Jubilee): 50 वर्ष की अवधि। 
  • डायमंड जुबली (Diamond Jubilee); 60 वर्ष की अवधि। 
  • प्लेटिनम जुबली (Platinum Jubilee): 75 वर्ष की अवधि। 
  • उत्तराद्ध (Second Half): सदी का द्वितीय 50 वर्ष (51-100 वर्ष तक)। 
  • सदी/शताब्दी (Century): 100 वर्ष की अवधि।
  • सहस्राब्दी (Millenium): 1000 वर्ष की अवधि।
  •   ग्रेट जुबली (Great Jubilee): 2000 वर्ष की अवधि।


वर्तमान कैलेंडर 
वर्तमान में ग्रेगोरियन कैलेंडर एक अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर है।
 इसे विश्व के सभी देशों में मान्यता दी गई है और विश्व के अधिकांश हिस्सों में इसी कैलेण्डर का प्रयोग किया जाता है। 

इटली के डाक्टर अलॉयसियस लिलिस (Aloysius Lilius) द्वारा प्रस्तावित इस कैलेण्डर की घोषण 24 फरवरी, 1582 में पोप ग्रेगरी-XII ने की थी। इन्हीं के नाम पर इस कैलेण्डर के नाम के साथ ग्रेगरी शब्द जुड़ा। प्राचीन जूलियन कैलेण्डर की अशुद्धियां सुधारने के लिए इसे प्रचलन में लाया गया।


                                  प्रमुख संवत्
कलि संवत(3102 B.C): महाभारत युद्ध व राजा परीक्षित के जन्म के समय से आरंभ। 

सप्तर्षि संवत (3076 B.C): इसे लौकिक संवत् भी कहा जाता है। कलि संवत के 25 वर्ष बाद कश्मीर में प्रचलित था। 
बुद्ध संवत (544 BC): श्रीलंका की गणना अनुसार बुद्ध संवत् 5443C में प्रारंभ हुआ। महात्मा बुद्ध के निर्वाण की वास्तविक तिथि 486 B.C थी। 

महावीर संवत् (527 B.C): महावीर स्वामी द्वारा आरम्भ, इस संवत् का प्रयोग जैन-सभा से संबोधित गणनाओं में हुआ है। |

विक्रम संवत् (58 B.C): राजा विक्रमादित्य द्वारा उज्जैयिनी में शको पर विजय प्राप्त करने के उपरांत  
              
                            ईसा मसीह का जन्म
 ईसा मसीह का जन्म प्रथम शताब्दी माना गया जिसमें पहले का काल B.C और बाद का 4.D. कहलाया।

 शक संवत् (78A.D.): कुषाण राजा कनिष्क द्वारा शुर या गया जिसे भारत सरकार द्वारा 22 मार्च 1957 को आधिकारिक कैलेंडर घोषित किया गया। इसे शालिवाहन संवत भी कहते हैं। यह भारत का राष्ट्रीय संवत् है।

 कल्चुरी संवत् (248 AD.): आभारी राजा बाद में चेदि के कल्चुरियों द्वारा प्रयुक्त होने पर यह कल्चुरी संवत् कहलाया। 

गुप्त संवत (319 A.D.): गुप्तवंशीय शासक चन्द्रगुप्त प्रथम द्वारा प्रारम्भ।

 हर्ष संवत (606 A.D.): कन्नौज के शासक हर्षवर्धन द्वारा राज्यारोहण के समय प्रारंभ किया गया। 

हिजरी संवत् (622 A.D)-622 ई.से हिजरी संवत का आरम्भ हुआ। यह तिथि हजरत मुहम्मद साहब का त्याग कर मदीना जाने की स्मृति में है। मदीना जाने को हिजरत कहा जाता है।

कोल्लम संवत् (825 A.D):  इस संवत् की शूरूआत  कल्याणी चालुक्य शासक विक्रमादित्य-4 द्वारा मालाबार केरल क्षेत्र में प्रारंभ था। इसे चालुक्य | विक्रम संवत कहा जाता है।

इलाही संवत(1583 A. D)  मुगल सम्राट अकबर द्वारा प्रारम्भ। 

राजक (1673): मराठा शासक छत्रपति शिवाजी द्वारा राज्यारोहण के उपलक्ष्य में प्रारंभ।।


                     प्राचीन इतिहास के स्त्रोत

प्राचीन इतिहास के जानकारी के लिए कई स्त्रोत उपलब्ध है। जिनमे
 साहित्य साक्ष्य:-इसके अंतर्गत वेद, वेद, उपनिषेद, पुराण, स्मृति, महाभारत, बौद्ध ग्रंथ आदि आते है।

देशीय यात्रा का विवरण:-  इसके अंतर्गत यूनानी लेेेखक,
चीनी लेखक जैसे फाह्यान शुंग-युन, ह्वेनसांग आदि आते है।

पुरातत्विक साक्ष्य:- पुरातत्विक साक्ष्यों में अभिलेख मुद्रओं 
स्मारकों भवनों से जानकारी मिलती है।


दोस्तो इस भाग में हमने केवल इतिहास का परिचय जाना है।
इस के बाद हम  प्राचीन भारत के इतिहास का विस्तृत अध्ययन करेंगे। अगर आप चाहते है कि कोई भी पाठ हमसे न छुटे तो हमारे site को follow जरूर करे।




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